खुद पे एहसान ना कर

खुद पे एहसान ना कर,जो दिल करे कर तू बेफिकर.. लोग रोकेंगे,बस तू रुक ना जाना,कभी टोके तो पीछे मुड़ ना जाना…माना की सफर आसान नही होगा,पर तू घबरा ना जाना..कभी ठोकर से गिर भी जाए,तो खुद को तू संभाल ही लेना… सफर में मुसाफिर भी मिलेंगे,कुछ भटका देते हैं तो कुछ सही राह भीContinue reading “खुद पे एहसान ना कर”

कश्मकश

इस कश्मकश में खुद को उलझाए रखा था हमने,आसमान को जमीन से मिलाने की जिद्द जो की थी हमने,हर नामुमकिन कोशिश भी किया,और नतीजे की परवा न किया,थी जुनून आसमान में खुशियों का रंग बिखेरू..थी शिद्दत जमीन के इश्क से आसमान को करूं रूबरू.. अब जब हुआ सबेरा,और पर्दा उठा इस बेवकूफी से..चाहे करे कोशिशContinue reading “कश्मकश”

Ishq ( Love )

The wordings of this poetry are of a Pakistani series “khuda aur mohabbat”. I had just converted those dialogues to poetry and add few lines from my end. इश्क कभी नाकाम नही होता, क्यूं की इश्क तो बस इश्क होता है…मिलजाये मेहबूब तो खुदा की इबादत,और ना मिले तो होता है इश्क की कसक,इश्क काContinue reading “Ishq ( Love )”

Topic – Fire

दिल में जलाए रखना ये आग 🔥 तू,खुद को बेहतर बनाने के लिए….उस आग 🔥 में खुद को जला मत देना,किसी और की दुनिया आबाद करने के लिए… बन जायेगा तू राख एक दिन,लोगों की मुश्किलों को समेट ते समेट ते…राख भी दरिया में बह जायेंगे एक दिन,खुद की ख्वाइशों को मिटाते मिटाते… तेरी तसव्वुरContinue reading “Topic – Fire”